मन्दिर-बाग और किलों का शहर ‘कोटा’ बन गया शिक्षा का हब

राजस्थान का प्रमुख शहर कोटा जिसको ' के नाम से जाना जाता था। लोगो का मानना है कि कोटिया भील के कारण से इसका नाम कोटा पड़ा। कोटा पहले बूँदी रियासत का एक बड़ा भाग था जहाँ हाड़ा चौहान का शासन चलता था। सन 1631 ई0 मे मुगल बादशाह शाहजहाँ के समय बूँदी के राजा रावरतन सिंह के पुत्र माधव सिंह को कोटा का राज्य सौप कर उसे बूँदी से अलग कर दिया गया। तभी से कोटा स्वतंत्र राज्य के रुप से सामने आया। सन 1947 मे देश स्वतंत्र होने के बाद कोटा का विलय राजस्थान मे हो गया।


कोटा शहर राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 245 किलोमीटर की दूरी पर चम्बल नदी के पूर्वी तट के किनारे स्थित है। कोटा शहर जो पहले मन्दिरो, किलो, संग्रहालयो, और बगीचो के लिये मशहूर था। कोटा राजस्थान का व्यापारिक केंद्र होने के साथ साथ औद्योगिक नगर भी है। यहां सीमेंट उद्योग, टेक्टाईल, फर्टिलाइजर उद्योग इत्यादी उपलब्ध है।



राजस्थान का प्रमुख शहर कोटा भारत का एक मात्र ऐसा शहर है जहाँ पर देश के कोने-कोने से आये लोग रह्ते है। इतना ही नही यह वर्ल्ड ट्रेड फोरम की सूची मे सबसे भीड़-भाड़ वाला शहर भी बन चुका है। जिसका एक मात्र कारण कोटा मे फैले आईआईटी और मेडीकल के कोचिंगो के जाल का है। यही कारण है कि कोटा शहर भारत मे 'शिक्षा की नगरी' के नाम से भी विख्यात है। कोटा को यह पहचान दिलाने के पीछे जिस सख्सियत हाथ है वह और कोई नही बल्कि उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद मे 26 अक्टूबर सन 1949 को जन्मे विनोद कुमार बंसल की है। जिन्होने बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद अपने कैरिअर की शुरुआत कोटा स्थित जेके सिंथेटिक्स कंपनी में इंजीनियर के पद से की और बाद में मांसपेशीय दुर्विकास (मस्क्युलर डिस्ट्रोफी) रोग से ग्रसित होने की वजह से अपनी नौकरी छोडनी पड़ी।


जिसके बाद उन्होने कोटा शहर मे ही बंसल कोचिंग क्लासेस की नीव रखी और पहले ही साल मे इनके कोचिंग के 10 छात्रों का आईआईटी मे चयन हुआ। इसी तरह दुसरे साल 50 और ऐसे ही यह कारवां आगे बढ़ता रहा बंसल की इस कामयाबी को देख कर लोगो की आंखे खुल गई उन्हे अब बहुत कुछ एहसास होने लगा और धीरे-धीरे एक एक कर कई कोचिगे खुलती चली गई। आज कोटा पूरे भारत मे सबसे बड़ा कोचिंग हब सेंटर बन चुका है। यहाँ कोचिगो से होने वाली कमाई अरबो मे है। इतना ही नही कई लोग ऐसे भी है जो कभी बंसल कोचिंग मे पढ़ाने का काम करते करते खुद कोचिंग सेंटर के मालिक बन चुके है जिनमे से एक नाम आर. के. वर्मा का भी है।


श्री वर्मा 1995 मे बतौर फिजिक्स के टीचर के रुप मे बंसल कोचिंग क्लासेस से अपने कैरिअर की शुरुआत की थी। सन 2001 मे उन्होने अपनी नौकरी छोड़ कर रेसोनेंस कोचिंग की स्थापना की जिसकी आज पुरे भारत मे 30 से ज्यादा शहरो से शाखाये है जिनमे लगभग 85 हजार छात्र/छात्राए अध्ययनरत है। यहा पर लोगो का मानना है कि कोटा मे चाहे जो भी कोचिंग हो वो बंसल सर के बनाये फॉर्मूला पे ही चल रही है। और आज यदि कोटा देश को इतने इंजिनीयर दे रहा है तो इसका श्रेय भी कही न कही बंसल जी को ही जाता है।


_अभिषेक उपाध्याय


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