प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर राज्यपाल को करना चाहिए हस्तक्षेप : अखिलेश यादव 

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कानूनव्यवस्था एक मजाक बनकर रह गई है। भाजपा सरकार इसके नियंत्रण में पूरी तरफ विफल है। मुख्यमंत्री जी के बयानों को उनके अधीनस्थ कोई तवज्जों नहीं देते हैं। अपराध रोज हो रहे हैं, मुख्यमंत्री जी के सख्त होने की खबरें भी छपती रहती है, पुलिस के छोटे-बड़े अफसरों की बैठकें भी खूब हो रही हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही नज़र आता है। राजधानी भी अपराधियों के लिए पनाहघर बन गई है। लखनऊ, अपराध की गिरफ्त में है।


राजधानी लखनऊ में इन दिनों लूट और हत्या की घटनाओं की बाढ़ आई हुई है। कारोबारियों की लूट की घटनाओं पर कोई रोक नहीं है। हत्या, लूट की घटनाओं को रोकने के बजाय पुलिस अब पीड़ितों के उत्पीड़न के ही रिकार्ड बनाने में लग गई है। राजधानी में कारोबारी मनोज भट्टाचार्य की हत्या के अलावा कई अन्य कारोबारी भी लुट चुके हैं, कई मामलों का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।


उन्होंने कहा, राजधानी लखनऊ भी असुरक्षा और अराजकता की शिकार है और आए दिन लूट हो रही है। फ्लैटों के ताले टूट रहे हैं, पुलिस कर्मी के भेष में ठगी की घटनाएं हो रही हैं, अवैध कब्जे हो रहे हैं और जब कोई पुलिस के पास न्याय मांगने के लिए जाता है तो उल्टे उसको ही अपराधी मान लिया जाता है। एक निर्दोष किशोर के साथ थर्ड डिग्री का मामला थमा भी नहीं था कि कैसरबाग कोतवाली में सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी को पिटाई के बाद हवालात में डाल दिया गया। आज ही दिनदहाड़े जीआरपी के पास चारबाग में और स्वास्थ्य भवन में गोलियां चल गई।


सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी सरकार में अपराध नियंत्रण के लिए यूपी डायल 100 की व्यवस्था की गई थी जिसमें पीड़ित की शिकायत पर चंद मिनटों में पुलिस की गाड़ी घटना स्थल पर पहुंच जाती और थाना कोतवाली तक दौड़ नहीं लगानी पड़ती। महिलाओं से छेड़छाड़ पर रोक लगाने के लिए 1090 वूमेन पावर लाइन की व्यवस्था शुरू हुई थी जिसकी सराहना देशभर में हो रही थी। भाजपा सरकार ने ये दोनों प्रभावी व्यवस्थाएं ही ध्वस्त कर दीं। नतीजा सामने है, रोज ही अपराध हो रहे है, अपराधी पकड़े नहीं जा रहे हैं, निर्दोष लोगों पर पुलिस जुल्म कर रही है, चारों तरफ अव्यवस्था और दहशत का माहौल है। भाजपा सरकार से जनता पूरी तरह असुरक्षित महसूस करती है। अभी 15 जून 2019 को ही राज्यपाल महोदय से भेंटकर प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर उनका ध्यान आकर्षित किया था, लेकिन लगता है उस पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। नागरिकों के जानमाल की सुरक्षा राज्य सरकार का दायित्व है। शासन-प्रशासन इस सम्बंध में न केवल संवेदनहीन है अपितु अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में भी असफल है। महामहिम राज्यपाल जी को इस पर तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।