श्रम कल्याण परिषद केवल कागजों का कर रहा श्रमिकों का कल्याण : वसीम हैदर

लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम हैदर ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार के अधीन श्रम कल्याण परिषद श्रमिकों का कल्याण केवल कागजों पर ही कर रही है और श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुनील भराला केवल अधिकारियों के साथ बैठके करके अपनी जिम्मेंदारियों की इतिश्री कर लेते हैं। 


श्री हैदर ने कहा कि वास्तव में श्रमिक वह है जो खेतों में जुताई-बुवाई से लेकर निराई और गुडाई का काम करता है। अमीरों के मकान बनाने में जो अपना खून पसीना बहाकर ईटा और मौरंग की ढुलाई करते हैं ऐसे श्रमिक को समाज का विश्वकर्मा कहा जा सकता है और पूजा के योग्य होता है। क्योंकि उसी के बदौलत अमीर लोग कोठी वाले कहलाते हैं।


इस प्रकार के वास्तविक श्रमिकों की दशा न तो पूर्ववर्ती सरकारों ने सुधारी और न ही वर्तमान सरकार का इनके प्रति कोई रूझान है। वास्तविकता यह है कि यही श्रमिक खाने पीने की वस्तुओं से लेकर रहने की व्यवस्था बनाते हैं। 


रालोद प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान सरकार ने श्रमिकों की सहायता की योजनाओं के नाम ही बदल डाले हैं। यह नाम डाॅ0 एपीजे अब्दुल कलाम योजना, गणेश शंकर कल्याण योजना, रानी लक्ष्मीबाई कल्याण योजना आदि हैं।आखिर ये सरकार केवल नाम बदलकर महापुरूषों के नाम जोड़कर वाहवाही लूटना चाहती है। प्रदेश में असंगठित श्रमिक लाखों की तादात मेें हैं और अपनी दयनीय दशा मेें जीवन यापन करते हुये दो वक्त की रोटी का इंतजाम करते हैं। उन्होंने सरकार से मांग करते हुये कहा कि असंगठित मजदूरों के हित को देखते हुये जिलाधिकारियों के माध्यम से इनकी सूची बनवाकर अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से योजनाओं की जानकारी पहुंचाए तभी श्रमिक कल्याण सम्भव है।