प्रदेश में लगतार गिर रहा है शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर : डाॅ0 मसूद

लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ0 मसूद अहमद ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार अवमूल्यन होता चला जा रहा है जिसके फलस्वरूप प्रदेश के नौनिहालों का मानसिक स्तर पर सकारात्मक पक्ष नहीं ले पा रहा है और प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों में नये नये प्रयोग करके इन विभागों में कार्यरत शिक्षकों तथा कर्मचारियों को उलझाने के साथ साथ आम जनता के समक्ष नये नये लाॅलीपाॅप का प्रलोभन दे रही है। 


डाॅ0 अहमद ने कहा कि शिक्षा सेवा अधिकरण बनने से शिक्षकों तथा कर्मचारियों के विवादों का निपटारा सुलभ होने की अपेक्षा दुर्लभ हो जायेगा क्योंकि अभी यह योजना साकार रूप लेने में काफी समय लेगी और न्यायालयों में लम्बित विवाद और लम्बित हो जायेंगे। प्रदेश सरकार के अधीन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग विगत लगभग 20 वर्ष से पंगु है। थोडे बहुत प्रयास से बीच बीच में आयोग सक्रिय हो जाता है लेकिन उसके सकारात्मक परिणाम बहुत कम देखने को मिलते हैं। एक ओर प्रदेश सरकार की शिक्षा के प्रति उदासीनता ने परिषदीय विद्यालयों में लगभग एक लाख पद रिक्त पड़े हैं तो दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा में भी लाखों की तादात में पद रिक्त हैं और सरकार उनको भरने में कोई रूचि नहीं रख रही है जबकि वर्तमान सरकार में तीसरा शैक्षिक सत्र प्रारम्भ हुये भी दो माह बीत चुके हैं। 


रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों और सहायता प्राप्त एवं राजकीय कालेजों की सरकार द्वारा लगातार उपेक्षा का ही परिणाम है कि जगह जगह पर प्राइवेट स्कूल और कालेजों ने अपनी धाक बना रखी है और अच्छी शिक्षा प्रदान करके जनता का विश्वास जीत रहे हैं। सरकार में बैठे मंत्रीगण केवल प्राइवेट स्कूल और कालेजों की आलोचना करने में व्यस्त रहते हैं क्योंकि उन पर सरकार का वृहद नियंत्रण नहीं होता यदि आलोचना के बजाय अपना समय मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सरकारी स्कूलों और कालेजों के साथ साथ सहायता प्राप्त स्कूल और कालेजों की साज सज्जा और शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर विचार करें तो प्रदेश का भविष्य संवर सकता है। प्रदेश सरकार को प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं का आभारी होना चाहिए क्योंकि सरकार की जिम्मेंदारी का निर्वहन इनके द्वारा हो रहा है।