"मृतक" ने मनाया अपना 25वां जन्मदिन....

लखनऊ। कोई इंसान मरकर जिंदा हो जाये ऐसा सिर्फ कहानियों में ही हुआ करता था। लेकिन हकीकत यही है कि ऐसा वाक्या आज़मगढ़ के लाल बिहारी के साथ घटित हुआ, जिन्हें प्रशासन के द्वारा मृतक घोषित कर दिया गया था। अब अगर इंसान जिन्दा हो तो वह अपने को कैसे मृतक माने। लाल बिहारी को अपने हक के लिये एक लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी। इन्ही सबका तानाबाना एक जीवित रूप देखने को मिला मृतक लाल बिहारी के 25 वें पुनर्जन्म में।


इस मौके पर मृतक ने खुद अपने जन्मदिन का केक काटते हुये उपस्थित मुख्य अतिथिगण के रूप में निर्देशक, निर्माता व अभिनेता सतीश कौशिक (लाल बिहारी मृतक पर आधारित कागज़ फिल्म के निर्देशक), मृतक संघ के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल, राज करन यादव, साहित्यकार शिवमूर्ति पाल सहित कई अतिथिगण को अपने जीवित होने का प्रमाण दिया।

लाल बिहारी मृतक पर आधारित कागज़ फिल्म का निर्देशन कर रहे विख्यात निर्माता/निर्देशक व अभिनेता सतीश कौशिक ने कहा कि सबसे पहले मैं लाल बिहारी जी को उनके पुनर्जन्म दिवस की बधाई देता हूं। हम लोग एक अच्छी स्टोरी बड़े लोगों की ज़िदगी में तलाशते हैं। कई बार वो हमें आम आदमी की ज़िदगी में मिल जाती है। मेरे लिये लाल बिहारी मृतक किसी सुपरमैन से कम नहीं हैं। लाल बिहारी मृतक पर आधारित हमारी फिल्म कागज़ की शूटिंग सम्पन्न हो चुकी है। जिसमें लाल बिहारी मृतक की भूमिका अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने निभाई है, जिसमें उनका साथ मोनल गज्जर ने दिया हैै। कागज़ की शूटिंग लखनऊ व सीतापुर में की गई है।

लालबिहारी ने कहा कि 'खुद के साथ जीवित, मृतकों और धोखाधड़ी से पीड़ितों की लड़ाई लड़कर उनकी हड़पी जमीन व मकानों को वापस दिलाकर सामाजिक न्याय, मानव अधिकारों की रक्षा, जीविकोपार्जन, जीवन रक्षा, संविधान व न्यायालय के सम्मान में मृतक संघ कार्य कर रहा है, जो आगे भी जारी रहेगा।