एएनएम सेंटर हुए ध्वस्त, कंडा व जंगली जानवरो की पनाहगार बने सेंटर

ऊंचाहार/रायबरेली। सूबे की सरकार के लाखों दावों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत आने वाले एएनएम सेंटरों की हालत सुधरने का नाम नही ले रहा है। जिसमें कहीं बिल्डिंग जर्जर तो कहीं पर स्थानीय दबंगो ने परिसर में अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा है, जिसके कारण उन सेंटरो में जंगली जीवों के भय से सेंटर का ताला खोलने तक में एएनएम घबराते हैं। यह मामला कहीं और का नही बल्कि वीवीआईपी जिले में सुमार जिला रायबरेली जनपद में जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर प्रयागराज मार्ग पर स्थित ऊंचाहार तहसील क्षेत्र का है।



दोनो ब्लाकों मे कुल 29 एएनएम सेंटर


बताते चले कि ऊंचाहार तहसील के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ो के मुताबिक 2,65,389 की आबादी है। जिसमे तहसील मे आने वाले ऊंचाहार व रोहनिया ब्लाक की बात करें तो ब्लाक ऊंचाहार में कुल 54 ग्राम पंचायत व रोहनिया ब्लाक में कुल 26 ग्राम पंचायते है।जिसमे इन दोनो ब्लाकों मे कुल 29 एएनएम सेंटर है जिसमे एक सीएचसी ऊंचाहार व दूसरा अरखा पीएचसी है जबकि 27 एएनएम सेंटर ग्रामीणांचल मे बने है। जिसमें एएनएम सेंटर इटौरा बुजुर्ग,मतरमपुर,ऊंचाहार देहात मे एएनएम की तैनाती न होने पर ताला लगा रहता है।जिसमे ग्राम पंचायत ईश्वरपुर के एएनएम सेंटर मे एएनएम तैनात है जो नियमतः जाती है। लेकिन यहां पर बिल्डिंग निसप्रयोग है जिसकी हालत ये है कि सेंटर मे बबुल के पेड़ परिसर मे ही उगे है और सेंटर के गेट के इर्द गिर्द घूर गांव के दबंगो के द्वारा जबरन लगाया गया है। जिससे यहां पर टीकाकरण व गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले सुविधाओं तक में दिक्कते होती है।



ग्राम पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी लाभ धड़ाम


कमोवेश अन्य सेंटरो की भी हालत यही है, जिसके चलते वहां सुविधा होने के बावजूद प्रसव शून्य की रिपोर्ट आता है। एएनएम सेंटरो मे नियमतः देखा जाए तो गर्भवती महिलाओं का समय समय पर टीकाकरण से लेकर प्रसव करवाने तक का विभागीय फरमान होता है। लेकिन वह कागजी कोरम तक ही सीमित रहता है, क्योंकि विगत कई महिनो का विभागीय रिकार्ड मे महज पचखरा सेंटर मे एक प्रसव हुआ है। जबकि अन्य सेंटरो मे शून्य रिकार्ड है। जिसका डाटा विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजा जाता है लेकिन विभाग के सक्षम अधिकारी भी इस ओर आंखे बंद किये हुए है। जिसके कारण ग्रामीणांचलो में लाखों की लागत खर्च करके खुले एएनएम सेंटरो में मिलने वाली ग्राम पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी लाभ धड़ाम हो चुकी है। जबकि सरकार पोस्टल व बैनर लगाकर करोंडो रूपए प्रचार प्रसार में फूंक रही है लेकिन एएनएम सेंटरों को प्लेटफार्म पर लाने के लिए कोई महत्वपूर्ण अभियान नही चल रहा है। जिससे कई एएनएम तो अपने घर पर बैठकर वेतन विभागीय सेटिंग गेटिंग करके उठा रही है इन बिल्डिगो मे जंगली जीव निवास करते है और तो और बरसात के दिनो मे यहां की हालत काफी बदहाल रहती है।


सीएचसी के अधीक्षक ने बताया कि नियमतः गांव-गांव फांगग करने के लिए एएनएम सेंटर मे 10-10 हजार रूपए व समस्त योजनाओं का पैसा समय समय पर भेजा जाता है। लेकिन वहां अव्यवस्थाएं क्यों हैं उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जहां की बिल्डिंगे खराब है वहां की विभागीय लिखापढी करके उन्हें भी उपयोग लायक बनाया जायेगा। उन्होंने प्रसव की प्रगति अधिकांश सेंटरो की शून्य होने के बाबत बताया कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गयी है जिसके बाद ही अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।