सतांव ब्लाक में आधे से ज्यादा राजकीय नलकूप ठप्प 
सतांव/रायबरेली। किसानों को आत्म निर्भर बना कर उनका जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकार ने जो सपने बुने हैं उनको सरकारी मुलाजिम ही तार-तार करने में जुटे हैं। ब्लाक क्षेत्र के किसान, सिंचाई संसाधनों के अभाव में न तो अपनी कृषि उपज बढा पा रहे हैं और न ही व्यवसायिक खेती करने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं।क्षेत्र की नहरों में बीते पैंतीस साल से पानी नहीं आया।चालीस से पचास फीट नीचे चले गये भूगर्भ जल स्तर के कारण डेढ सौ फीट गहरे नलकूप बन्द हो गये।ऐसे में निजी सिंचाई संसाधन के अलावा राजकीय नलकूप ही ऐसा सिंचाई का साधन है,जिससे आम तबके का किसान अपनी फसल की हलक तर कर सकता है,लेकिन सतांव के राजकीय नलकूपों की दशा नहरों से भी बदतर है। आश्चर्य में डालने वाला विषय है कि सतांव ब्लाक की पचास ग्राम पंचायतों में लगे इकत्तीस राजकीय नलकूपों में बीस खराब पड़े हैं,और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी,अधीनस्थों को इसका जबाबदेह  बताकर अपनी खाल बचाने की फितरत में जुटे हैं।यह तब है जब,जायद की फसल की सिंचाई के लिए चौतरफा हाहाकार मचा है,और धान की तैयारी अधर में लटकी है।


            

सिंचाई विभाग ने सतांव क्षेत्र के किसानों को बेहतर और सुलभ सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने के महत्वाकांक्षी मकसद से समूचे ब्लाक क्षेत्र में इकत्तीस राजकीय नलकूप स्थापित किये हैं। इनमें बीस राजकीय नलकूप बन्द पड़े हैं।अनुमान लगाया जा सकता है कि आधे से ज्यादा सरकारी ट्यूबवेल बन्द होने के कारण डार्क ऐरिया घोषित सतांव ब्लाक के किसानो की हालत क्या होगी। किसान जायद की फसल की सिंचाई के लिए इन नलकूपों का मुंह ताक रहे हैं।उपेक्षा का आलम यह है कि अर्से से ठप्प पड़े नलकूपों को बनवाने की सुधि विभाग नहीं ले रहा है।

               

एक जानकारी के मुताबिक सतांव ब्लाक क्षेत्र में स्थापित कुल 31 राजकीय नलकूपों में से बीस विभिन्न कारणों से खराब हैं। क्षेत्र के कोन्सा व सुल्तानपुर खेड़ा ग्राम पंचायतों में दो-दो नलकूप खराब हैं,जबकि मनेहरू, नकफुलहा, बरदर, कोरिहर, पोरई, जगजीवनपुर अमरिया, देदानी, कृष्णपुर ताला पंचायतों में एक-एक नलकूप बन्द है। आधे से ज्यादा नलकूप बन्द होने की वजह से किसान न तो धान की तैयारी कर पा रहे हैं,और न ही जायद की फसल बचा पा रहे हैं।

 

सिंचाई के अन्य अनेक सिंचाई संसाधनों से रहित सतांव क्षेत्र के किसान धान की बेढ़ डालने की स्थिति में नहीं हैं। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि वह इतनी समस्याओं के बावजूद खराब नलकूपों को ठीक कराने की कोई कोशिश नहीं कर रहा है। विभाग यदि इन नलकूपों को समय रहते ठीक न करा पाया तो,जायद के साथ किसानों की धान की फसल भी चौपट हो जायेगी। कोन्सा के किसान पुतानी दीक्षित, मलिकमऊ के विजय बहादुर सिंह,बण्डे के आनन्द प्रकाश, सतांव के पप्पू पाण्डेय,ओनई के लाले शर्मा और सहजौरा के मो.रहीस आदि ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सतांव ब्लाक के राजकीय नलकूपों की दशा सुधारने के लिए वे स्वयं हस्तक्षेप करें और नलकूप चालू करायें,जिससे जायद की फसल गंवा चुके किसानों को कम से कम धान की फसल ही मिल जाय।

 

रिपोर्ट-रत्नेश मिश्र