CEO से मिला सपा प्रतिनिधिमंडल,करी EVM से छेड़छाड़ की शिकायत


लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमण्डल ने आज राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मऊ जनपद में लोकसभा क्षेत्र घोसी के चुनाव में प्रयोग हुई ईवीएम मशीनों के साथ जिला प्रशासन द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत की। प्रतिनिधिमण्डल में राजेंद्र चौधरी राष्ट्रीय सचिव, विधायक द्वय शैलेन्द्र यादव 'ललई' एवं राकेश प्रताप सिंह शामिल थे।


सपा कार्यकर्ताओं पर चलायी लाठी


प्रतिनिधिमण्डल ने अपने ज्ञापन में कहा कि घोसी में चुनाव के बाद 20 मई 2019 की रात में मंडी समिति के स्ट्रांग रूम में, जहां ईवीएम मशीनें रखी गई थी, संदिग्ध वाहनों एवं व्यक्तियों के आवागमन की सूचना दिए जाने पर वहां पर मौजूद पुलिस अधीक्षक मऊ सुरेन्द्र बहादुर ने समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव के साथ आए कार्यकर्ताओं पर लाठियां चला दी।प्रतिनिधिमण्डल ने जनपद इलाहाबाद तथा हापुड़ में समाजवादी पार्टी के साथ पक्षपात किए जाने के बारे में भी जानकारी दी।


भाजपा के इशारे पर ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़


ज्ञापन में कहा गया है कि मऊ जिला प्रशासन द्वारा ईवीएम की सुरक्षा हेतु मात्र दो व्यक्तियों के लिए अनुमति दी गई है जबकि मंडीस्थल पर तीन गेट हैं जिनकी 8-8 घंटे सुरक्षा हेतु 36 व्यक्तियों की आवश्यकता है। लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है, यह बेहद गंभीर स्थिति है। प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा के इशारे पर ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ और पुलिस अधीक्षक मऊ के कृत्य की जांच तथा आवश्यक कार्यवाही किए जाने की मांग की है।


एआरओ मेज पर मतगणना अभिकर्ता बैठाने की

प्रतिनिधिमण्डल ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा है कि मतगणना केंद्रों में आरओ तथा एआरओ टेबल पर एजेन्टो को कलकुलेटर की अनुमति दिया जाना चाहिए। लोकसभा क्षेत्रों के विधानसभा क्षेत्रों पर पड़े मतों का क्षेत्रवार विवरण उपलब्ध कराया जाए। इसके अतिरिक्त मतगणना स्थल पर 23 मई को मतगणना के दिन प्रत्याशियों के समर्थकों के लिए टेण्ट लगाने का स्थान निश्चित किये जाने की मांग है। इसके साथ ही एआरओ मेज पर मतगणना अभिकर्ता बैठाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

श्री चौधरी ने कहा कि जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास कायम रखने के लिए 23 मई को पूरे राज्य के 80 लोकसभा क्षेत्रों के मतगणना केन्द्रों पर किसी प्रकार की धांधली की सम्भावना नहीं होनी चाहिए। इस लोक उत्सव में सत्तारूढ़ दल के पक्ष में सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग पर अंकुश लगाकर पारदर्शिता को बरकरार की व्यवस्था किया जाये।