अमेरिका के 7 विश्वविद्यालयों में सीएमएस छात्र का स्कॉलरशिप के साथ चयन

लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, महानगर कैम्पस के मेधावी छात्र औन अशरफ ने उच्च शिक्षा हेतु America अमेरिका के 7 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप के साथ चयनित होकर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है। इस मेधावी छात्र को चार वर्षीय शिक्षा अवधि के लिए अमेरिका की पेस यूनिवर्सिटी द्वारा 72,000 अमेरिकी डालर, फ्लोरिडा इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा 40,000 अमेरिकी डालर, यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी द्वारा 40,000 अमेरिकी डालर, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा द्वारा 36,000 अमेरिकी डालर, यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोईस, शिकागो द्वारा 24,000 अमेरिकी डालर, यूनिवर्सिटी ऑफ यूटाह द्वारा 20,000 अमेरिकी डालर एवं वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा 16,000 अमेरिकी डालर की स्कॉलरशिप से नवाजा गया है।


उत्कृष्टता के दम पर America में


इस प्रकार सी.एम.एस. के इस प्रतिभाशाली छात्र ने अपने मेधात्व एवं शैक्षिक उत्कृष्टता के दम पर America अमेरिका सहित विदेश में स्कॉलरशिप के साथ उच्चशिक्षा हेतु चयनित होकर विद्यालय का नाम रोशन किया है। सी.एम.एस. छात्र की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विद्यालय के संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने बधाई दी, साथ ही विद्यालय के विद्वान व कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों का आभार व्यक्त किया है।


सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी हरि ओम शर्मा ने बताया कि इस वर्ष अभी तक सी.एम.एस. के 73 छात्र अमेरिका, इंग्लैण्ड, कैनडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर, जर्मनी आदि विभिन्न देशों के ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालयों में चयनित हो चुके हैं, जिनमें से अधिकतर को स्कॉलरशिप प्राप्त हुई है।


श्री शर्मा ने आगे कहा कि सी.एम.एस. छात्रों के दृष्टिकोण व्यापक बनाने व उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने हेतु सदैव प्रयासरत है और इसी कड़ी में छात्रों को भारत में एवं विदेशों में उच्चशिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर रहा है। सी.एम.एस. प्रदेश में एकमात्र एस.ए.टी. (सैट) एवं एडवान्स प्लेसमेन्ट (ए.पी.) टेस्ट सेन्टर है जो उत्तर प्रदेश एवं आसपास के अन्य राज्यों के छात्रों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद कर रहा है। इससे पहले, विदेश में उच्चशिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक प्रदेश के छात्रों को सैट परीक्षा के लिए दिल्ली जाना पड़ता था।